Monday, March 27, 2023
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राजस्थान के सबसे मशहूर शिव मंदिर, जो बने आकर्षण का केंद्र

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राजस्थान(There are many Shiva temples in different areas of Rajasthan which are very famous): राजस्थान भारत में क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य है। आपको बता दे कि राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है जो अपनी खूबसूरती, पर्यटन स्थलों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। राजस्थान में बहुत से ऐसे मंदिर भी है जो प्रमुख आकर्षण का केंद्र हैं।

जिस तरह पूरे भारत में अलग अलग जगह बहुत से शिव मंदिर है, उसी तरह राजस्थान के अलग अलग क्षेत्रों में बहुत से शिव मंदिर हैं जो बहुत प्रसिद्ध हैं और दुर-दुर से लोग इन मंदिरो को देखने राजस्थान आते हैं। आज हम आपको बताएंगे राजस्थान के उन्हीं प्रसिद्द शिव मंदिरों के बारे में, जो अपनी विशेषता के लिए जाने जाते हैं। तो आइये जानते हैं, राजस्थान के इन शिव मंदिरों के बारे में।

अलवर शहर का नालदेश्वर महादेव मंदिर है सबसे प्राचीन

राजस्थान के अलवर शहर से 24 किमी दूर स्थित नालदेश्वर महादेव मंदिर। ये गांव अपने प्राचीन महादेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह पत्थर की चोटियों और सुंदर हरियाली से चारों ओर से घिरा हुआ है।

इस मंदिर में एक प्राकृतिक शिवलिंग है जिसकी बड़ी संख्या में भक्त वर्ष भर पूजा करते हैं। मानसून की पहली बारिश के बाद इस स्थान की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। यहां हर वर्ष हजारों लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते है।

यह मंदिर शिवाड़ कस्बे में देवगिरी पर्वत पर बना हुआ है

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है घुश्मेश्वर महादेव मंदिर। ये शिव पुराण के कोटिरूद्र संहिता के 32 वें श्लोक के अंतिम चरण में घुश्मेश्वर का स्थान शिवालय नामक स्थान होना बताया गया है। इसी शिवालय का नाम मध्यकाल में बिगड़कर शिवाल और शिवाल से वर्तमान में शिवाड़ हो गया। यह भारत के द्वादशों ज्योतिर्लिंग में अंतिम ज्योतिर्लिंग है, यह मंदिर शिवाड़ कस्बे में देवगिरी पर्वत पर बना हुआ है।

आपको बता दे कि घुश्मेश्वर मंदिर पर महाशिवरात्रि पर पांच दिनों के विशेष मेले का आयोजन होता है। इस मेले में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। बताया जाता है कि यह मंदिर नो सौ वर्ष पुराना है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयं प्राकट्य बताया जाता है।

तीन मंजिला देवालय 150 स्तंभों पर खड़ा मंदिर है

देव सोमनाथ मंदिर, डूंगरपुर से 24 किमी दूर देवगाँव में स्थित है। सोम नदी के किनारे स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। ब ता दे कि ये मंदिर सफेद पत्थर से बना हुआ है। तीन मंजिला देवालय 150 स्तंभों पर खड़े मंदिर का हर एक स्तंभ कलापूर्ण है।

निज मन्दिर में अन्य कलात्मक मूर्तियाँ और कृष्ण पाषाण का एक शिवलिंग है। शिवालय के पीछे विशाल कुंड है जिसे पत्थरों की एक नाली गर्भगृह से जोड़ती है।

इस मंदिर में बनी धूणी पर भगवान परशुराम ने की थी कठोर तपस्या

परशुराम महादेव का मंदिर राजस्थान के राजसमन्द और पाली जिले की सीमा पर स्तिथ है। मुख्य गुफा मंदिर राजसमन्द जिले में आता है जबकि कुण्ड धाम पाली जिले में आता है। इस गुफा की मंदिर तक जाने के लिए 500 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है। इस गुफा मंदिर के अंदर एक स्वयं भू शिवलिंग है जहां पर विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने भगवान शिव की कई वर्षो तक कठोर तपस्या की थी।

तपस्या के बल पर उन्होंने भगवान शिव से धनुष, अक्षय तूणीर एवं दिव्य फरसा प्राप्त किया था। मान्यता है कि मुख्य शिवलिंग के नीचे बनी धूणी पर कभी भगवान परशुराम ने शिव की कठोर तपस्या की थी। इसी गुफा में एक शिला पर एक राक्षस की आकृति बनी हुई है। जिसे परशुराम ने अपने फरसे से मारा था।

इस मंदिर का शिवलिंग है खुद-ब-खुद दिन में तीन बार रंग बदलता

राजस्थान के धौलपुर जिले की अगर बात की जाए तो यहां अचलेश्वर महादेव मन्दिर सबसे ज्यादा प्रसिध्द है। आपको बता दे कि ये मंदिर राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। यह स्थान चम्बल के बीहड़ों के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ स्थित शिवलिंग जो कि खुद-ब-खुद दिन में तीन बार रंग बदलता है।

सुबह के समय शिवलिंग का रंग लाल रहता है, तो वही दोपहर को यह केसरिया रंग का हो जाता है, और जैसे-जैसे शाम होती है शिवलिंग का रंग सांवला हो जाता है। हजारों साल पुराने मन्दिर की अपनी एक अलग ही आस्था है।

 

 

 

 

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