Tuesday, November 29, 2022
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राजस्थान में कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के निधन से एक बार फिर से उपचुनाव होना तय

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(जयपुर): राजस्थान के चूरू जिले की सरदारशहर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के निधन से एक बार फिर से विधानसभा उपचुनाव होना तय हो गया है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले कांग्रेस और बीजेपी के लिए इसे सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है।

राजस्थान में सियासी संकट के बाद सीएम अशोक गहलोत की इज्जत़ दांव पर लगी है। इससे पहले उपचुनाव में कांग्रेस ने उदयपुर की वल्लभनगर और प्रतापगढ़ के धरियावद विधानसभा सीट पर बडी जीत हासिल की थी। राज्य में गहलोत और पायलट कैंप की खींचतान के बीच कांग्रेस पार्टी के लिए यह उपचुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा। सीएम आशोक गहलोत लोक कल्याणकारी योजनाओं से वोटर्स को लुभाएंगे, वहीं बीजेपी, कानून व्यवस्था पर घेरने की कोशिश करेगी।

2018 के चुनाव में कांग्रेस को मिली 99 सीटें

आपको बता दें कि राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के चुनाव में कांग्रेस की राज्य में 99 सीटें मिली थी, लेकिन चुनावों के बीच ही अलवर की रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी का निधन हो गया था, जिस कारण चुनाव आयोग ने रामगढ़ विधानसभा सीट का चुनाव स्थगित कर दिया था। बाद में जब यहां चुनाव हुए तो कांग्रेस की ओर से साफिया जुबैर ने चुनाव लडा और ये चुनाव जीतने में कामयाब रही। रामगढ़ सीट को जीतकर ही कांग्रेस के विधायकों की संख्या 100 हुई थी।

कांग्रेस ने झुंझुनूं की मंडावा सीट जीतकर धमाकेदार तरीके से एंट्री की। लेकिन कांग्रेस, खींवसर विधानसभा सीट पर आपना जलवा नही दिखा पाई जिस कारण उसे हार का सामना करना पड़ा था। चूरू की सुजानगढ़ और भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा उपचुनाव भी कांग्रेस जीतने में सफल रही। हालांकि, राजसमंद से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। अब तक हुए विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को सफलता ही मिली है। यादि कांग्रेस विधानसभा उपचुनाव हार जाती है, तो इसे सीएम आशोक गहलोत के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

सतीश पूनिया को सौंपी गयी राजस्थान की कमान

यादि देखा जाये तो विधानसभा उपचुनाव बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि जब से सतीश पूनिया को राजस्थान की कमान सौंपी गयी है, जिस आनुसार उम्मीद लगाई जा रही थी, उसके अनुरुप पार्टी को वैसी सफलता नहीं मिली है। बीजेपी को पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। बीजेपी को सिर्फ जिला परिषद के चुनाव में पार्टी को मिली थी।

बीजेपी ने सतीश पूनिया पर ही भरोसा जताया है। उपचुनाव सतीश पूनिया के मान के लिए भी महत्वपूर्ण है तो वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भी चूरू जिले से ताल्लुक रखते है। ऐसे में उनकी इज्जत़ के लिए भी चूरू में बीजेपी का जीतना बहुत जरुरी होगा। आपको बता दें कि राजेंद्र राठौड़ गहलोत सरकार के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर रहते हैं। नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया के लिए भी यह उपचुनाव काफी मायने रखता है।

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